यूपी चुनाव की रणभेरी !!

सात चरण हैं,
लंबा रण है,
लहर तीसरी
यह लक्षण हैं,
नारे घटिया,
संग फटफटिया,
बढ़िया कुर्सी,
चमकत हटिया,
सपा, भाजपा,
कांग्रेस, बसपा
बहिन अ भ्राता
सोनिया माता,
डूबे डोंगी,
बिहसत जोगी,
शांत मुलायम,
माया क़ायम,
नहीं है सिंपल
समझें डिम्पल
पर नेताजी
घूमें टेम्पल,
बजेगा डंका
कहें प्रियंका
दुःखी सपोर्टर,
लगेगी लंका,
दल है पीला,
नेता ढीला,
कुछ नहि सूखा,
सब कुछ गीला
चलेगा ढाबा,
राहुल बाबा
करि पदयात्रा,
भूलें मात्रा,
पानी-दाना
रोना गाना,
कुछ मेरठ तो,
कुछ कैराना
चक्कू छूरी
सब्ज़ी पूरी
बड़ा समर्थन
लाएगा धन
इत्र लुट गया
भारी है मन,
मथुरा, क़ाबा
सूफ़ी, बाबा
कहाँ है ‘खाँसी’
पूछे काशी
ग़ायब आज़म
भारी है ग़म
पूरी चुप्पी,
नहीं रहा दम
एक धुरी थे,
रामपुरी थे,
सब ख़रबूज़ा,
वही छुरी थे,
कंठी माला,
गड़बड़ झाला,
जो सब देखत
ओहि शिवपाला
कहे भतीजा
यही नतीजा
धोती सूखी
कुर्ता भीजा
क्षत्रिय, ब्राह्मण
खुला हुआ रण
यादव, क़ुर्मी
भारी गर्मी
केवट, मौर्या
एहि दिनचर्या
देकर थपकी,
लेकर झपकी
चार वोट की
रेनकोट की
खड़ी व्रूम की
बाथरूम की
दिल्ली जद की
कुछ संसद की
आँख दिखाओ
सब फल पाओ
सेब, मुसम्मी,
खीरा, केला,
जेबा ख़ाली
नहीं अधेला
नेता की जय
वोटर में भय
वाह वाह की,
उसी चाह की,
जीते पार्टी
अमित शाह की
सत्ता में दल
मिले तभी कल
प्रतिक्रिया है
अनुप्रिया है
दिखे न एका
दुखी मनेका
हुआ चहेटा
घायल बेटा
चाय ईरानी
थोड़ा पानी
जले अंगीठी,
टंच अमेठी,
प्रेश्या-रण में
सबकुछ पण में
सोच चंद है,
देवबंद है,
वोट दिया है
वही शिया है
दिखा बतीसी,
बिजी ओवैसी,
फेक न्यूज़ है,
टेक व्यूज़ है,
वोटर का तो
मग़ज़ फ्यूज़ है,
नाव एक हो
सोच नेक हो
यूपी भर की
तरकश शर की
सही तंत्र की,
एक मंत्र की
फिर फिर जय हो,
लोकतंत्र की !

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