शादीशुदा आदमी के सपने !!

सपना देखे । राजा बना दिए गए ।

सुबह नहा-धोकर दरबार पहुँचे । बहुत ज़ोर से उद्धघोष हुआ “फलाने महाराज पधार रहे हैं” |

अंदर गए तो किसी ने नोटिसै नहीं किया । हम धीमे से ख़ख़ारे । फिर भी नहीं कोई सनका । बहुत तेज़ी से बोले अरे हम आ गए हैं । बेतरतीब से फैले काग़ज़ समेटते हुए सब खड़े हुए ।

हम बैठे राजगद्दी पर । सब फिर अपने काम में लग गए ।

अरे महामंत्री आज का अजेंडा क्या है” मंत्री जी रजनीगंधा चबा रहे थे । पीकते हुए बोले ।

महाराज की जै हो । आज कोई काम नहीं है । आप आराम से बैठो और हवा खाओ ।

हमने हवा करने वाली सहायिकाओं की तरफ़ मुंडी घुमाकर देखा तो खड़ी बतिया रहीं थीं ।

हमें देखकर बोलीं : “ हमारी ड्यूटी शुरू होती है ८ बजे , आप आए दस बजे दो घंटा हम हवा कर चुकीं । आपकी तरह नहीं हैं , टाइम पर काम करती हैं , आधे घंटे का ब्रेक है अभी ।

चारों तरफ़ देखकर इंश्योर किया की किसी ने देखा तो नहीं । पहली बार लगा चलो कोई नोटिस नहीं करता , ये भी ठीकै है । बग़ल में घंटी बजाने का बटन था । एक बार बजाया कुछ नहीं हुआ । दो-तीन बार जल्दी जल्दी बजाई तो दरबान भागता हुआ । एक पैर के जूते के फ़ीते खुले हुए थे ।

अरे , महाराज की जै हो , काहे घंटी घनघना रहे हैं , कौनो बिपदा आ गयी का ?” दरबान जी बोले ।

अरे कोई फ़रियादी आया हो तो भेजो थोड़ा न्याय कर ही कर लें , ख़ाली बैठे हैं” हम बोले ।

“न्याय तो १९ में हो चुका , उसके बाद से जनता खुस है, बोलो तो आपका मामला सुलटवा दें”

“मेरा कौन सा मामला बे” हम बोले।

“एक तो ये बे ते करके बात करिए ना , सबको बता देंगे आपकी सवारी रानी साहिबा लेकर शॉपिंग पर चली गयी हैं और आप अब पैदल घर जाएँगे” दरबान जी ने उद्घोष किया।

एकदम से शांति छा गयी दरबार में । सबके मुँह खुले रह गए जैसे वाक़ई में आवाक़ रह गए हों ।

“अच्छा किए किसी को नहीं बताए” हमने सर्कैज़म दिखाने की कोशिश की ।

मंत्री जी , आप सब मामला टाइट रखिएगा , हम लंच करके आते हैं , दरबान सवारी निकालो” हम फ़्लो में बोल गए थे ।

मंत्री जी मुस्कुराते हुए बोले “महाराज की जै हो , जैसी आज्ञा”

चिलचिलाती धूप में पैदल घर जाना पड़ा । बग़ल से एक स्कूल से अपने पापा की साइकल पर आते बच्चे ने केले का छिलका ठीक हमारे सामने फेंक दिया हम फिसलकर जग गए ।

शादीशुदा आदमी सपने भी अपने जैसे देखता है : शादीशुदा !!

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